जैसे ही जेरोम पॉवेल का फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, उनकी इस अवधि का आर्थिक मोर्चे पर गहन विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने न केवल आर्थिक मंदी से बचाव किया, बल्कि अपने कार्यकाल के दौरान बेरोजगारी दर को अपने पूर्ववर्ती प्रमुखों की तुलना में सबसे कम, औसतन 4.6% पर बनाए रखा।
पॉवेल 2018 से फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष रहे हैं, और उनका कार्यकाल डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन के अंतिम वर्षों के साथ शुरू हुआ तथा जो जो बाइडेन प्रशासन तक जारी रहा। इस दौरान, उन्होंने मौद्रिक नीतियों के माध्यम से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके कार्यकाल के दौरान, वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं जैसे व्यापार युद्ध और COVID-19 महामारी की वजह से आर्थिक चुनौतियां उत्पन्न हुईं। इसके बावजूद, पॉवेल ने फेडरल रिजर्व की नीतियों के तहत ब्याज दरों को नियंत्रित करते हुए आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान की।
विश्लेषकों का मानना है कि पॉवेल की नेतृत्व में बेरोजगारी दर में कमी और आर्थिक सुधार की प्रक्रिया ने अमेरिकी बाजारों को स्थिरता दी। इस दौरान, उन्होंने प्रतिभूति बाजारों में विश्वास बनाए रखा और वित्तीय संस्थानों की स्थिति को मजबूत किया।
हालांकि, पॉवेल के निर्णय कुछ आलोचकों के लिए विवादास्पद भी रहे हैं, विशेषकर मुद्रास्फीति से निपटने के उपायों और ब्याज दरों को बढ़ाने के संदर्भ में। इसके बावजूद, उनकी रणनीतियों ने वर्तमान आर्थिक चुनौतियों को झेलने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि जब पॉवेल फेड के अध्यक्ष के रूप में पद छोड़ेंगे, तो उनका कार्यकाल एक मिश्रित छवि के साथ याद किया जाएगा, जिसमें आर्थिक स्थिरता और मंदी से बचाव प्रमुख रूप से सामने आये। उनका नेतृत्व अमेरिकी आर्थिक इतिहास में एक निर्णायक अध्याय के रूप में दर्ज होगा।















