*छबड़ा में घर-घर दीप यज्ञ की पुकार, मत्रों से गूंज उठा नगर, हर घर घर की यही पुकार, घर से मीठे अंधकार,
* जो व्यक्ति सफल, प्रगतिशील और सम्मानित जीवन जीना चाहते हैं, उन्हें अपने भीतर छिपी हुई क्षमताओं और सामर्थ्य को जगाने का प्रयास करना चाहिए। लोग अक्सर बाहरी साधनों और परिस्थितियों में सफलता खोजते हैं,जबकि उसका वास्तविक आधार स्वयं का परिष्कृत व्यक्तित्व होता है। बाहरी प्रयासों के साथ-साथ आंतरिक सुधार, संतुलित मनःस्थिति और प्रखर मनस्विता आवश्यक हैं। जब भीतर की स्थिति सुधर जाती है, तो बाहरी परिस्थितियाँ भी स्वतः अनुकूल हो जाती हैं और प्रगति का मार्ग सुगम बन जाता है। मानव जीवन में मानसिक संतुलन का होना अत्यंत आवश्यक है। जब हमारे विचार, भावनाएँ और क्रियाएँ एक-दूसरे के अनुरूप नहीं होतीं, तब मनुष्य अशांत, असंतुलित और विकृत हो जाता है। जो व्यक्ति परिस्थितियों के अनुसार अपने मन और विचारों को ढाल लेता है, वही जीवन में प्रसन्नता और शांति का अनुभव करता है “सोशल मीडिया गायत्री शक्तिपीठ छबड़ा रामचरण प्रजापति”














